भेड़ व बकरी पालन हेतु सरकार दे रही अनुदान

संवाद न्यूज़ एजेंसी
बदायूँ। उ0प्र0 सरकार प्रदेश में रोजगार वृद्धि करने के लिये बकरी/भेड पालन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिये सरकार लोगों को बकरी/भेड़ पालन के लिये सब्सिडी देते हुए प्रोत्साहित कर रही है। भेड़ बकरी पालन योजनान्तर्गत कोई भी व्यक्ति लाभ ले सकता है। किसानों द्वारा पशुपालन कर अपनी आय दो गुनी की जा सकती है। विशेष कर कम लागत और कम श्रम से बकरी/भेड़ पालन लाभकारी है। भारत में बकरे की मांस की काफी मांग है। घरेलू बाजार में भी इसकी बहुत माँग है। अधिक आर्थिक लाभ के कारण बकरी/भेड़ पालन एक अच्छा व्यवसाय है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पशुपालन को बढ़ावा देते हुये पशुपालकों को अनुदान सहित कई सुविधायें दे रही है। प्रदेश के जनपद इटावा में भेड़ एवं बकरी पालन प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गयी है। यह प्रशिक्षण केन्द्र प्रदेश में प्रथम स्थापित किया गया है। जनपद इटावा में राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत रू0425 लाख की लागत से यह केन्द्र निर्मित किया गया है। इस केन्द्र में 1200 बकरी/भेड़ पालकों/इच्छुक व्यक्तियों को वैज्ञानिक तरीकों से व्यावसायिक भेड़ एवं बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें 30 आवासीय एवं 10 अनावसीय प्रशिक्षणार्थियों को एक बार मेें 5 दिवसीय निशुल्क प्रशिक्षण दिये जाने की सुविधा है। इस वर्ष दिसम्बर 2024 तक लगभग 700 लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है।
भेड़ एवं बकरी पालन प्रशिक्षण केन्द्र इटावा में भेड़ बकरी पालकों/पालन हेतु इच्छुक व्यक्तियों को नवीनतम तकनीक एवं आर्गेनिक विधि (इन्सेक्टीसाइड एवं एन्टीबायोटिक मुक्त) से भेड़ एवं बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थियों को बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान की उपयोगिता की जानकारी देकर दुग्ध एवं मांस उत्पादकता में सुधार कर भेड़ एवं बकरी पालकों की आय में वृद्धि किया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दुघनत एवं मांस के उत्पादन एवं सुव्यवस्थित विपणन की जानकारी दी जाती है। भेड़ एवं बकरी पालन के क्षेत्र में रोजगार सृजन कर भेड़ एवं बकरी पालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जा रहा है। उद्यमिता विकास एवं कृषक संगठनों को दृष्टिगत रखते हुए भेड़ एवं बकरी पालकों/पालन हेतु इच्छुक व्यक्तियों को व्यावसयिक स्तर पर भेड़ एवं बकरी पालन हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बकरी पालन योजनान्तर्गत प्रति बकरी इकाई (01 नर, 05 मादा बकरियां) उपलब्ध करायी जाती हैं। प्रति इकाई लागत रू045000/- है। जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान स्वरूप रू0 40,500/- एवं 10 प्रतिशत रू04,500/- लाभार्थी द्वारा वहन किया जाता है। वर्ष 2024-25 में 739 बकरी पालन इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो पूर्ण किया जा रहा है।
बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान के प्रथम चरण 2023-24 मेें 35 जनपदों में 490 केन्द्रों के माध्यम से बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान किये जाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। अद्यतन माह नवम्बर, 2024 तक 11,025 लक्ष्य के सापेक्ष 4,148 कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। उक्त कार्य हेतु अद्यतन 714 प0चि0अ0/प0प्र0अ0/पैरावेट को प्रशिक्षित किये जा चुके है।
भेड़ पालन योजनान्तर्गत प्रति भेड़ इकाई (01 नर, 20 मादा भेड़) उपलब्ध करायी जाती हैं। प्रति इकाई लागत रू0 1,70,000/- है। जिसमेें 90 प्रतिशत अनुदान स्वरूप रू0 1,53,000/- एवं 10 प्रतिशत रू017,000 लाभार्थी द्वारा वहन किया जायेगा। भेड़ पालन के क्षत्र में 38 जनपदों में वर्ष 2023-24 में 221 भेड़ इकाईयों की स्थापना कर रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्ष 2024-25 हेतु 225 भेड़ पालन इकाईयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो प्रगति पर है।
प्रदेश के भेड़ पालकों को उतराखण्ड राज्य से 250 रेमबुले नस्ल के उन्नत मेढ़े पूर्व चयनित 11 जनपदों में उपलब्ध कराया जा रहा है। चयनित जिलों में से 09 जनपदों में 190 मेढ़ों को उतराखंड राज्य से प्राप्त कर चयनित लाभार्थियों को वितरित किया गया है।
जनपद इटावा मेें भेड़ एवं बकरी पालकोंको 05 दिवसीय भेड़ एवं बकरी पालन प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता है। वर्ष 2024-25 हेतु 1200 भेड़ एवं बकरी पालन प्रशिक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसमें लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त कर लाभार्थी उच्च गुणवत्ता की नस्ल सुधार कर ऊन उत्पादन को बढ़ा सकते है जिससे पालकों को ऊन का उचित मूल्य मिल सकें। पशुपालकों से खादी एवं ग्राम्य उद्योग द्वारा पशुपालन विभाग के सहयोग से ऊन क्रय किये जाने की व्यवस्था है।
