जामिया हमदर्द में चौथा हकीम अब्दुल हमीद मेमोरियल लेक्चर आयोजित

संवाद न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली।जामिया हमदर्द के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन यूनानी मेडिसिन में दिनांक 16 दिसंबर 2025 को सपोर्ट सोसाइटी (2S) के तत्वावधान में चौथा हकीम अब्दुल हमीद मेमोरियल लेक्चर अत्यंत गरिमा, शैक्षणिक गंभीरता और बौद्धिक ऊँचाई के साथ आयोजित किया गया। इस शैक्षणिक सत्र का विषय “यूनानी फार्मेसी में सुधार के संदर्भ में हकीम अब्दुल हमीद की शैक्षणिक सेवाएँ” रखा गया, जिसमें यूनानी चिकित्सा के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के अरबी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सैयद हसनैन अख्तर ने की, जबकि नागालैंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. जॉन आलम, आईएएस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर अनवर हुसैन खान (डीन, स्कूल ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड रिसर्च), प्रोफेसर सईद अहमद (निदेशक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन यूनानी मेडिसिन), प्रोफेसर अब्दुल वदूद सिद्दीकी तथा डॉ. शकील अहमद शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ पवित्र क़ुरआन की तिलावत से हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
मुख्य व्याख्यान हकीम फ़ख़्र-ए-आलम (रिसर्च ऑफिसर, यूनानी, आरआरआईयूएम, अलीगढ़) ने प्रस्तुत किया। अपने शोधपरक संबोधन में उन्होंने हकीम अब्दुल हमीद के बहुआयामी व्यक्तित्व और विशेष रूप से यूनानी औषधि निर्माण में उनके सुधारात्मक एवं शैक्षणिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हकीम अब्दुल हमीद की सेवाएँ केवल भारत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप में यूनानी फार्मेसी के विकास में मील का पत्थर साबित हुईं। उन्होंने औषधि निर्माण में प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक विधियों के संतुलित समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
हकीम फ़ख़्र-ए-आलम ने मानकीकरण, औषधियों के प्रभाव में एकरूपता, औषधि रूपों में संशोधन और शेल्फ लाइफ निर्धारण जैसी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए औद्योगिक स्तर पर अनुसंधान की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने क़राबादीन मजीदी, क़राबादीन हमदर्द, एनएफयूएम पार्ट–5, हमदर्द फार्माकोपिया तथा हमदर्द फार्माकोपिया ऑफ ईस्टर्न मेडिसिन को आधुनिक यूनानी फार्मेसी की वैचारिक आधारशिला बताया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. शकील अहमद ने अपने संबोधन में हकीम अब्दुल हमीद साहब से अपने वैचारिक, शैक्षणिक और संस्थागत ताल्लुक़ का उल्लेख करते हुए कहा कि हकीम साहब केवल एक महान यूनानी चिकित्सक नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद, सुधारक और समाजसेवी भी थे। उन्होंने कहा कि जामिया हमदर्द और हमदर्द संस्थानों की स्थापना एवं विकास में हकीम अब्दुल हमीद की सोच आज भी मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य कर रही है।
डॉ. शकील अहमद ने इस बात पर जोर दिया कि यूनानी चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जिस वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अकादमिक अनुशासन और सामाजिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है, उसकी ठोस नींव हकीम अब्दुल हमीद साहब ने बहुत पहले रख दी थी, और वर्तमान पीढ़ी की यह जिम्मेदारी है कि उस विरासत को आगे बढ़ाया जाए।
अन्य विशिष्ट अतिथियों प्रोफेसर अनवर हुसैन खान, प्रोफेसर अब्दुल वदूद सिद्दीकी और प्रोफेसर सईद अहमद ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए हकीम अब्दुल हमीद की शैक्षणिक सेवाओं और सुधारात्मक दृष्टिकोण को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्य अतिथि डॉ. जॉन आलम, आईएएस ने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक व्याख्यान चिकित्सा विरासत और आधुनिक अनुसंधान के बीच सेतु का कार्य करते हैं और युवा पीढ़ी में ज्ञान, सेवा और अनुसंधान की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
अध्यक्षीय भाषण में प्रोफेसर सैयद हसनैन अख्तर ने हकीम अब्दुल हमीद के विज़न, मिशन और सामाजिक सेवाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें एक युगद्रष्टा व्यक्तित्व बताया।
कार्यक्रम के समापन पर शैक्षणिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली छात्रों डॉ. साद अरशद सिद्दीकी, मिस मुबश्शिरा इरफ़ान, मिस ज़ारा मजीद, मिस्टर मुहम्मद तारिज़, मिस्टर नादिर सबा, मिस्टर मुहम्मद अकीब और मिस्टर सैयद ज़ैद मुनीर को अख़लाक़ हुसैन यंग एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
आभार प्रदर्शन सपोर्ट सोसाइटी (2S) के संस्थापक महासचिव हकीम अजमल अख़लाक़ ने किया। स्वागत भाषण आयोजन अध्यक्ष सैयद मुनीर अज़मत ने प्रस्तुत किया, जबकि संस्था का परिचय और वार्षिक रिपोर्ट डॉ. अब्दुल्लाह ने रखी।
कार्यक्रम के कन्वीनर डॉ. नाज़िश एहतिशाम आज़मी थे।
राष्ट्रगान, मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष के समापन वक्तव्यों तथा हाई-टी के साथ यह शैक्षणिक एवं बौद्धिक सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
