हमारी जड़े है, इनको मजबूत रखना चाहिए-डॉ संजय पासवा

संवाददाता रोहित सेठ
वाराणसी।महाराज बलवन्त सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग और आई.सी. एस.एस.आर. द्वारा “21 वीं सदी में ग्रामीण भारत पुनर्निर्माण और रुपान्तरण” विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 01 मार्च से 02 मार्च 2025 तक राजातालाब परिसर में किया जायगा। कार्यक्रम के शुभारम्भ के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संजय पासवान (पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री, भारत सरकार), विशिष्ट अतिथि प्रो बंशीधर पाण्डेय (महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी), प्रो अजय कुमार सिंह(काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी) अध्यक्ष के रूप में प्रो० बृजेश सिंह जी (संकायाध्यक्ष, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी) की गरिमामय उपस्थिति रही। सर्वप्रथम माँ सरस्वती और संस्थापक महाराज के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ मंचस्थ अतिथि व महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो पुरुषोत्तम सिंह और प्रो० आलोक कुमार कश्यप (संयोजक, राष्ट्रीय संगोष्ठी) ने किया। अतिथियों के स्वागत, वैदिक मंगलाचरण, स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम में अतिथियों का वाचिक अभिनन्दन प्राचार्य प्रो पुरुषोत्तम सिंह ने किया। संगोष्ठी के विषय की रूपरेखा और प्रस्तावना को प्रो. आलोक कुमार कश्यप ने रखा। अतिथियों के उद्बोधन के क्रम में प्रो. अजय कुमार सिंह ने ग्रामीण भारत के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की प्राथमिकता पर जोर दिया, उन्होंने कहा कि यदि भारत की संस्कृति, भारत का विज्ञान किसी ने सुरक्षित रखा है तो ग्रामीण भारत ने। इनके बाद प्रो. वंशीधर पाण्डेय ने ग्रामीण भारत के प्रभुत्व, शोषण व संघर्ष की चर्चा करते हुए अपने लक्ष्य पर अडिग रहने की राय दी। इनके बाद मुख्य अतिथि डॉ. संजय पासवान जी ने सोशल मैनेजमेंट, अन्त्योदय मॉडल, मेरा गाँव मेरा देश, ग्रामीण सम्पन्नता आदि विषयों पर उद्बोधन दिया तथा शिक्षकों को ईमानदारी से कार्य करने के लिये कहा। गाँव हमारी जड़ है उसे मजबूत करने की आवश्यकता है, गाँव में एकजुटता, एकरुपता, संप्रभुता, समरसता लाने के लिये हम सबको प्रयास करना चाहिये। तत्पश्चात अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो० बजेश कुमार सिंह ने ग्रामीण भारत के लिये संयुक्त परिवार की महत्ता पर जोर दिया, उन्होंने तकनीक के माध्यम से ग्रामीण विकास की चर्चा की। ग्रामीण क्षेत्र के विकास में तकनीक के माध्यम से पुनर्निर्माण के लिये कौशल प्रदान करने के लिये भारत सरकार की प्रयासों की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने, संचालन डॉ. दुर्गेश कुमार पाण्डेय ने, वैदिक मंगलाचरण डॉ. अभिषेक अग्निहोत्री ने और स्वागत गीत डॉ. अंजना ने प्रस्तुत किया । राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के कई विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के लगभग 500 प्रतिभागी गण उपस्थित रहे।
