भाइयों के माथे पर तिलक कर बहनों ने की दीर्घायु की कामनाएं,उल्लास संग मनाया भैयादूज -प्रभारी दातागंज

संवाददाता अभिषेक वर्मा
बदायूँ, प्रेम और स्नेह का त्योहार भाई दूज मनाया जा रहा है। भाईयों के खुशहाल जीवन की बहनें कामनाएं कर रही है । त्योहार के चलते बसों में भारी भीड़ देखी गई। जिसके चलते दातागंज कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर दातागंज अरिहंत सिद्धार्थ ने महिलाओं से वार्ता कर उनको भैया दूज की शुभकामना देते हुए बधाई दी और कहा कि भैया दूज का पर्व प्रेम का प्रतीक है, और अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस दिन खुशियों से बहन-भाईयों की झोली भर जाती है। दीर्घायु की कामना होती है और सुरक्षा का संकल्प दिया जाता है। इसी के चलते सभी लोग त्योहार के चलते वाहन को सुरक्षित होकर सावधानी से चलाएं सावधानी से यात्रा करें , बसों में य किसी भी वाहन में यात्रा करने के दौरान किसी भी तरह की कोई भी परेशानी हो , तत्काल पुलिस को सूचना दे , साथ ही दातागंज प्रभारी इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ व कस्वा इंचार्ज हरीश कुमार ने कई महिलाओं से तिलक कराकर मुँह मीठा कर भैया दूज मनाया, वही इंस्पेक्टर दातागंज ने कोतवाली पुलिस को मुख्य मार्गो पर पुलिस वल को लगाकर जाम न लगे इसको लेकर निर्देशित किया। वही महिलाओं ने हमारे संवाददाता अभिषेक वर्मा से वार्ता करने के दौरान बताया कि दातागंज प्रभारी इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ व कस्वा इंचार्ज हरीश कुमार द्वारा हम लोगों से वार्ता की गई, यात्रा के संबधित जनकारी ली गई, हम लोग कहना चाहेंगे कि समाज की सुरक्षा करने वाले ऐसे दोनों भाई दातागंज प्रभारी इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ व कस्वा इंचार्ज हरीश कुमार की लंबी उम्र की कामना करते हैं।और उनके तिलक लगाकर मुँह मीठा करा कर हम नें भैया दूज भी मनाया है। इस कार्यशैली के चलते बदायूँ एसएसपी डॉ.बृजेश कुमार सिंह नें प्रशंसा की।बता दें कि
इस पर्व पर बहने अपने भाई की लम्बी उम्र की कामना को लेकर की जाती है। इस दिन बहने व्रत रख यमराज की पूजा करती है। जिसमें बहनें यमराज का आह्वान कर उनसे विनती करती है कि मेरे भाई की उम्र दीर्घायु किया जाये।भैया दूज प्रेम,आस्था व विश्वास के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की धरोहर मानी जाती है। अपने भाई को यम के त्रास से मुक्ति दिलाने के लिए सबसे उपयुक्त पर्व माना जाता है। जानकारी के अनुसार प्राचीन काल में यमराज अपने बहन यमुना से बहुत प्रेम करता था, लेकिन ज्यादा काम होने के वजह से अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते थे। एक दिन यमराज अपनी बहन की नाराजगी को दूर करने के लिए उनसे मिलने उनके यहां पहुंचे।भाई को आते देख यमुना को बहुत खुशी हुई और भाई को तरह तरह की स्वादिष्ट व्यंजन खिलाकर खूब सत्कार किया। तब जाकर अपने बहन से मिलने के बाद यमराज यमुना से विदा लेने लगे, तब यमराज ने अपनी बहन से खुश होकर वरदान मांगने को कहा। उनके आग्रह को देखते हुए यमुना ने कहा कि अगर आप मुझे वरदान देना चाहते हैं, तो यही वरदान दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आए और मेरा आतिथ्य को स्वीकार करें। कहा जाता है कि इसके बाद हर साल भाई दूज का त्यौहार मनाया जाने लगा। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है।भाई दूज के दिन बहने रोली और अक्षत अपने भाई के माथे पर लगाया करते हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर लंबी उम्र का आशीर्वाद भी देती है। ग्रंथों के अनुसार भैया दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है। रक्षाबंधन की तरह भाई दूज का भी अपना ही एक महत्व है,साथ ही भाई दूज के दिन को दीपोत्सव का समापन दिवस भी कहा जाता है।
